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वाणिज्य बैंकों द्वारा आवास ऋण - एलटीवी अनुपात, जोखिम भार तथा प्रावधानीकरण

आरबीआइ/2010-11/324
बैंपविवि.बीपी. बीसी. 69/08.12.001/2010-11

23 दिसंबर 2010
2 पौष 1932 (शक)

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/
मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी अनुसूचित बैंक
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)

महोदय

वाणिज्य बैंकों द्वारा आवास ऋण -
एलटीवी अनुपात, जोखिम भार तथा प्रावधानीकरण

कृपया मौद्रिक नीति 2010-11 की दूसरी तिमाही समीक्षा के 104 से 106 पैराग्राफ (उद्धरण संलग्न) देखें जिनमें वाणिज्य बैंकों द्वारा आवास ऋण के संबंध में कतिपय उपाय प्रस्तावित किए गए हैं । तदनुसार, बैंकों को निम्नानुसार सूचित किया जाता है :

1. मूल्य के प्रति ऋण (एलटीवी) अनुपात

वर्तमान में बैंकों के आवास ऋण एक्सपोज़र के संबंध में एलटीवी अनुपात पर कोई विनियामक उच्चतम सीमा नहीं है । अत्यधिक लीवरेजिंग को रोकने के लिए अब से आवास ऋणों से संबंधित एलटीवी अनुपात 80 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए । तथापि, कम मूल्य के आवास ऋण अर्थात् 20 लाख रुपये तक के आवास ऋणों (जिन्हें प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र अग्रिम के रूप में वर्गीकृत किया गया है) के मामले में यह निर्णय लिया गया है कि एलटीवी अनुपात 90 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए ।

2. जोखिम भार

14 मई 2008 के परिपत्र सं. बीपी. बीसी. 83/21.06.001/2007-08 के अनुसार 75 प्रतिशत तक एलटीवी अनुपात वाले रिहायशी आवास ऋणों के मामले में जोखिम भार 30 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत और उससे अधिक ऋण पर 75 प्रतिशत है । यदि एलटीवी अनुपात 75 प्रतिशत से अधिक है तो सभी आवास ऋणों के लिए जोखिम भार 100 प्रतिशत है, चाहे ऋण की राशि कुछ भी हो । अब से 75 लाख रुपये और उससे अधिक राशि वाले रिहायशी आवास ऋणों के लिए जोखिम भार 125 प्रतिशत होगा, चाहे एलटीवी अनुपात कुछ भी हो, ताकि उच्च मूल्य वाले आवासीय बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोका जा सके ।

3. प्रावधानीकरण

यह देखा गया है कि कुछ बैंक लुभावनी (टीजर) दर अर्थात् पहले के कुछ वर्षों के लिए अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर आवास ऋण मंजूर करने की प्रथा अपना रहे हैं जिसे बाद में उच्चतर दर पर पुनर्निर्धारित किया जाता है । यह प्रथा चिंताजनक है क्योंकि सामान्य ब्याज दर, जो प्रारंभिक वर्षों में लागू दर से उच्चतर रहती है, के एक बार प्रभावी होने के बाद कुछ उधारकर्ताओं के लिए उस दर पर ऋण की चुकौती करना काफी कठिन हो सकता है । यह भी देखा गया है कि कई बैंक प्रारंभिक ऋण मूल्यांकन करते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं कि उधारकर्ता सामान्य उधार दरों पर चुकौती करने की क्षमता रखता है या नहीं । अत: ऐसे ऋणों के साथ जुड़े उच्चतर जोखिम को ध्यान में रखते हुए बकाया राशि पर मानक आस्ति प्रावधानीकरण को 0.40 प्रतिशत से बढ़ाकर तत्काल प्रभाव से 2.00 प्रतिशत कर दिया गया है । इन आस्तियों पर प्रावधानीकरण उस तारीख से 1 वर्ष बाद पुन: 0.40 प्रतिशत हो जाएगा जिस तारीख को दरों को उच्चतर दरों पर पुनर्निर्धारित किया गया हो , बशर्ते खाते मानक बने हुए हों।

भवदीय    

(बि. महापात्र)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक

अनुलग्नक : यथोक्त


वाणिज्य बैंकों द्वारा आवास ऋण

आवास ऋणों में मूल्य के प्रति ऋण अनुपात

104. वर्तमान में बैंक के आवास ऋण दिए जाने से संबंधित मूल्य के प्रति ऋण (एलटीवी) अनुपात के संबंध में कोई विनियामक उच्चतम सीमा अस्तित्व में नहीं है । अत्यधिक लीवरेजिंग को रोकने की दृष्टि से यह प्रस्ताव है कि :

  • अब भविष्य में आवास ऋणों से संबंधित एलटीवी अनुपात 80 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए ।

रिहायशी आवास ऋणों पर जोखिम-भार

105. वर्तमान में 30 लाख रुपये तक के रिहायशी आवास ऋणों, जिनका एलटीवी अनुपात 75 प्रतिशत तक है, के लिए जोखिम भार 50 प्रतिशत है, जबकि उससे अधिक राशि के ऋणों के लिए यह अनुपात 75 प्रतिशत है । यदि एलटीवी अनुपात 75 प्रतिशत से अधिक है तो सभी आवास ऋणों के लिए जोखिम भार 100 प्रतिशत है, चाहे ऋण की राशि कुछ भी हो । तदनुसार यह प्रस्ताव है कि :

  • 75 लाख रुपये और उससे अधिक राशि वाले रिहायशी आवास ऋणों के लिए जोखिम भार को बढ़ा कर 125 प्रतिशत कर दिया जाए, चाहे एलटीवी अनुपात कुछ भी हो ।

आवास ऋणों के लिए लुभावनी (टीज़र) दरें

106. यह देखा गया है कि कुछ बैंक ‘लुभावनी (टीज़र) दर’ पर आवास ऋण मंजूर करने की प्रथा अपना रहे हैं, जिसमें पहले के कुछ वर्षों के लिए अपेक्षाकृत कम ब्याज दर की पेशकश की जाती हैं, जबकि बाद में उन्हें काफी बढ़ा दिया जाता है । यह प्रथा चिंता में डालती है, क्योंकि कुछ उधारकर्ताओं के लिए सामान्य ब्याज दर, जोकि प्रारंभिक वर्षों में लागू दर से काफी अधिक हो, पर ऋण की चुकौती करना काफी कठिन महसूस होगा । यह देखा गया है कि कई बैंक प्रारंभिक ऋण मूल्यांकन करते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं कि उधारकर्ता सामान्य उधार दरों पर चुकौती करने की क्षमता रखता है या नहीं । ऐसे ऋणों से जुड़े उच्चतर जोखिम को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव है कि :

  • वाणिज्य बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऐसे सभी ऋणों का मानक आस्ति प्रावधानीकरण बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाए ।

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